पता है तुम पीछे नहीं मुड़ोगे
फिर भी सोचती हूँ एक बार तो देखोगे
कैसे नहर से नदी, नदी से सागर बन गयी मैं
एक कतरा प्यार की खातिर यूँ बदल गयी मैं
Scattered pieces of myriad emotions, some known and most unknown
पता है तुम पीछे नहीं मुड़ोगे
फिर भी सोचती हूँ एक बार तो देखोगे
कैसे नहर से नदी, नदी से सागर बन गयी मैं
एक कतरा प्यार की खातिर यूँ बदल गयी मैं
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